आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय देश में आवासन और शहरी कार्य से संबंधित सभी मुद्दों के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार का एक शीर्ष प्राधिकरण है जो नीति निर्धारण कार्यक्रम को प्रायोजित और समर्थन देने, विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और नोडल प्राधिकरणों के कार्यकलापों को समन्वित करने और कार्यक्रमों की निगरानी संबंधी कार्य करता है ।
शहरी विकास से संबंधित मामले भारतीय संविधान द्वारा राज्य सरकारों को सौंपा गए हैं। संविधान (74वां संशोधन) अधिनियम द्वारा इनमें से अनेक कार्यों को स्थानीय निकायों को सौंपा गया है ।भारत सरकार का संवैधानिक और विधिक प्राधिकार दिल्ली और अन्य संघ शासित प्रदेशों और उन विषयों तक, जिन्हें राज्य विधान-मंडल विधान बनाने के लिए संसद को प्राधिकृत करते हैं, सीमित है ।
तथापि, भारत सरकार कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और पूरे देश की नीतियों और कार्यक्रमों को दिशा प्रदान करने में प्रभावकारी कदम उठाती है । राष्ट्र के नीतिपरक मुद्दों पर भारत सरकार निर्णय लेती है जो राज्य सरकारों को विभिन्न केन्द्रीय प्रायोजित स्कीमों के माध्यम से संसाधनों का आबंटन भी करती है, राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से वित्त उपलब्ध कराती है और समग्र देश में शहरी विकास के लिए विभिन्न बाह्य सहायता कार्यक्रमों को सहायता प्रदान करती है । भारत सरकार के राजकोषीय, आर्थिक और औद्योगिक स्थानों संबंधी निर्णयों का अप्रत्यक्ष प्रभाव देश में शहरीकरण और भू-संपदा निवेश की पद्धति पर अधिक पड़ता है ।
इस मंत्रालय का गठन 13 मई, 1952 को हुआ था । उस समय इसका नाम, आवास व आपूर्ति मंत्रालय था । बाद में जल आपूर्ति मंत्रालय अलग से गठित किया गया तो इसका पुन:नामकरण निर्माण व आवास मंत्रालय के रूप में किया गया । मंत्रालय का नाम सितंबर, 1985 में, शहरी मुद्दों को मान्यता देते हुए, बदल कर शहरी विकास मंत्रालय कर दिया गया। 8 मार्च, 1995 को शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन नाम अलग से गए विभाग का सृजन होने से इस मंत्रालय को शहरी कार्य और रोजगार मंत्रालय के नाम से जाना जाने लगा । मंत्रालय के दो विभाग थे - शहरी विकास विभाग और शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन विभाग । 9 अप्रैल, 1999 को इन विभागों को मिलाकर फिर एक कर दिया गया और उसके परिणामस्वरूप इसका फिर से नाम ‘’शहरी विकास मंत्रालय’’ कर दिया गया । 16.10.1999 को इस मंत्रालय को दो मंत्रालयों में बांट दिया गया अर्थात (1) शहरी विकास मंत्रालय और (2) शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन मंत्रालय । 27.05.2000 को इन दोनों मंत्रालयों को फिर से मिलाकर एक कर दिया गया और इसे ‘’शहरी विकास और गरीबी उपशमन मंत्रालय’’ बनाया गया जिसके दो विभाग थे । (1) शहरी विकास मंत्रालय और (2) शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन विभाग । 27 मई, 2004 को राष्ट्रपति जी की 27.05.2004 की अधिसूचना संख्या सीडी/160/2004 के द्वारा मंत्रालय को फिर से दो मंत्रालयों में विभक्त कर दिया गया नामत: (1) शहरी विकास मंत्रालय और (2) शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन मंत्रालय । बाद में शहरी रोजगार मंत्रालय और गरीबी उपशमन मंत्रालय का नाम 1/6/2006 के दस्तावेज संख्या सीडी - 299/2006 के द्वारा बदलकर आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय कर दिया गया ।
मंत्रिमंडल सचिवालय, भारत सरकार के गजट अधिसूचना सं. एसओ 2163 (ई) दिनांक 06.07.2017 के माध्यम से, शहरी विकास और आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालयों का एक मंत्रालय में विलय किया गया, अर्थात् आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय।
आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय का नेतृत्व श्री हरदीप सिंह पुरी, माननीय मंत्री करते हैं, जिसमें श्री कौशल किशोर, माननीय राज्य मंत्री उनकी सहायता करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर, मंत्रालय का नेतृत्व सचिव श्री मनोज जोशी, भा.प्र.से. करते हैं।
भारत सरकार(कार्यों का आबंटन) नियम,1961 के अनुसार आवासन और शहरी कार्यमंत्रालय को निम्नलिखित विषय आबंटित किए गए हैं
1.निम्नलिखित के सिवाय संघ की सम्पत्तियां, चाहे वे भूमि हो अथवा भवन, अर्थात:
(क) जो रक्षा मंत्रालय, रेल मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग की हों,
(ख)भवन अथवा भूमि, जिनके संनिर्माण अथवा अर्जन के लिए धनराशि सिविल संकर्म बजट से भिन्न किन्हीं अन्य साधनों से जुटायी गयी हो; और
(ग)भूमि अथवा भवन, जिसका नियंत्रण, उनके संनिर्माण अथवा अर्जन के समय अथवा बाद में, स्थायी रूप से दूसरे मंत्रालयों और विभागों को सौंप दिया गया है ।
2.सभी सरकारी सिविल कार्य और भवन, जिनके अंतर्गत संघ राज्य क्षेत्रों के कार्य और भवन तो हैं, किन्तु सड़क और रेल मंत्रालय, डाक विभाग, दूरसंचार विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग द्वारा निष्पादित कार्य या उनके भवन नहीं हैं ।
3.उद्यान संबंधी कार्यकलाप ।
4.केन्द्रीय लोक निर्माण संगठन ।
5.इस मंत्रालय के नियंत्रणाधीन सरकारी होस्टलों सहित सरकारी सम्पदाओं का प्रशासन । महानगरों में कार्यालयों की अवस्थापना या वहां से उनका विसर्जन ।
6.विज्ञान भवन में जगह का आबंटन ।
7.चार पुनर्वास बाजारों, अर्थात सरोजिनी नगर मार्केट, शंकर मार्किट, प्लेजर गार्डन मार्केट और कमला मार्केट का प्रशासन ।
8.विस्थापित व्यक्ति (प्रतिकर और पुनर्वास) अधिनियम, 1954 (1954 की 44) के अधीन दिल्ली और नयी दिल्ली में सरकार निर्मित संपत्तियों के संबंध में पट्टा और हस्तान्तरण विलेख तथा पट्टा विलेख का परिवर्तन, अतिरिक्त भूमि का आवंटन और ऐसी सम्पत्तियों के समीप सुधारात्मक क्षेत्र संबंधी मुद्दा ।
9.सरकारी प्रकाशनों सहित भारत सरकार के लिए लेखन सामग्री और मुद्रण ।
10.रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड को आवंटित कार्य मदों के अध्यधीन तकनीकी आयोजना सहित शहरी परिवहन प्रणाली की आयोजना एवं समन्वय ।
11.भारतीय रेल द्वारा वित्तपोषित प्रणालियों को छोड़कर रेल आधारित शहरी परिवहन प्रणालियों के लिए अधिकतम और न्यूनतम दरों तथा किराया भाड़ों का निर्धारण ।
12.ट्राम्वे जिसके अंतर्गत नगरपालिका सीमाओं अथवा किसी अन्य संलग्न क्षेत्र के भीतर भूमोपरि द्रुतगामी ट्राम भी शामिल है ।
13.नगर और ग्राम नियोजन: महानगरीय क्षेत्रों की आयोजना और विकास, इस क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी सहायता से संबंधित मामले ।
14.दिल्ली में भूमि का बड़े पैमाने पर अर्जन, विकास और निपटान की स्कीम ।
15.दिल्ली विकास प्राधिकरण ।
16.दिल्ली मास्टर प्लान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मास्टर प्लान तथा स्लम स्वीकृति विषयक काम का समन्वय।
17.स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में स्मारकों की स्थापना ।
18.सरकारी कॉलोनियों का विकास ।
19.स्थानीय शासन, अर्थात, नगर निगमों का (जिनके अंतर्गत दिल्ली नगर निगम नहीं आता है), नगर पालिकाओं (जिनके अंतर्गत नई दिल्ली नगर पालिका समिति नहीं आती है) और स्थानीय स्वायत्त प्रशासनों, जिनके अंतर्गत पंचायती राज संस्थाएं नहीं आती हैं, का गठन और उनकी शक्तियां।
20.दिल्ली नगर निगम का दिल्ली जलापूर्ति और सीवेज निपटान उपक्रम।
21.शहरी क्षेत्रों से संबंधित जलापूर्ति, (जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरूद्वार मंत्रालय को सौंपे गये जल आयोजना और समन्वय के संपूर्ण राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के अधीन) सीवेज जल निकास तथा स्वच्छता और आबंटित जल संसाधनों से लिंकेज। इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी सहायता ।
22. केन्द्रीय स्थानीय स्व शासन परिषद ।
23.दिल्ली में सरकारी भूमि का आबंटन ।
24.राजघाट समाधि समिति का प्रशासन ।
25.राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की आयोजना और विकास तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम, 1985 (1985 का 2) के प्रशासन से संबंधित सभी मामले ।
26.भारतीय राष्ट्रीय कला और सांस्कृतिक विरासत न्यास (इनटैक) से संबंधित मामले ।
27.शहरी अवस्थापना से संबंधित आवास एवं नगर विकास निगम (हडको) से संबंधित सभी मामले ।
27क एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड और इसकी सहायक कम्पनियों से संबंधित मामले1 ।
27 ख हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड से संबंधित मामले2 ।
28.आवास नीति और कार्यक्रम बनाना (ग्रामीण आवास को छोड़कर जिसे ग्रामीण विकास विभाग को सौंपा गया है), प्लान स्कीमों के कार्यान्वयन की समीक्षा, आवास, भवन निर्माण सामग्री तथा तकनीक पर डाटा एकत्रीकरण तथा प्रसार, भवन निर्माण लागत को कम करने तथा राष्ट्रीय आवास नीति के लिए नोडल दायित्व के लिए उपाय ।
29.आवास और मानव बसाव के क्षेत्र में मानव बसाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा तकनीकी सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र आयोग सहित मानव बसाव ।
30.स्लम क्लियरेंस स्कीम तथा झुग्गी और झोपडि़यों को हटाने संबंधी स्कीमों सहित शहरी विकास । इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा तकनीकी सहायता ।
31.नेशनल कोऑपरेटिव हाऊसिंग फैडरेशन ।
32.समय-समय पर तैयार किए गए अन्य कार्यक्रमों सहित शहरी रोजगार तथा शहरी गरीबी उपशमन के विशेष कार्यक्रमों का कार्यान्वयन ।
33.अचल संपत्ति अधिग्रहण और अर्जन अधिनियम, 1952 (1952 का 30) का प्रशासन ।
34.दिल्ली होटल (वास सुविधा नियंत्रण) अधिनियम, 1949 (1949 का 24) का प्रशासन ।
35.लोक परिसर (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली ) अधिनियम, 1971 (1971 का 40) ।
36.दिल्ली विकास प्राधिकरण 1957 (1957 का 61) का प्रशासन ।
37.दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 (1958 का 59) ।
38.शहरी भूमि (अधिकतम सीमा और विनियमन) अधिनियम, 1976 (1976 का 33) ।
39.दिल्ली नगर कला आयोग, दिल्ली नगर कला आयोग अधिनियम,1973(1973 का 1)
40.पथ विक्रेता (आजीविका का संरक्षण और पथ विक्रेताओं का विनियमन) अधिनियम, 2014 (2014 का 7)1 का प्रशासन।
41.भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (2016 का 16)2 का प्रशासन ।